UP News|| Rise In Gold Demand|| Lucknow News: सोने की कीमतों और आयात शुल्क में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद भी उत्तर प्रदेश में इसकी मांग कम नहीं हो रही है। शादी-ब्याह, पारंपरिक बचत और निवेश की सुरक्षित आदतों के कारण प्रदेश में हर साल करीब 100 टन सोने की खपत बनी रहती है। सराफा कारोबारियों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद लोग सोने को अब भी सबसे भरोसेमंद संपत्ति मानते हैं। यूपी में सोने की मजबूत खपत ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के अनुसार उत्तर प्रदेश देश की कुल सोने की खपत में लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ और आगरा जैसे शहर राज्य के बड़े सराफा बाजार माने जाते हैं, जहां लगातार सोने की खरीदारी होती रहती है। बढ़ते आयात शुल्क विशेषज्ञों के मुताबिक सोने पर आयात शुल्क समय-समय पर बढ़ाया गया है। पहले यह लगभग 2% था, जिसे 2012-13 में बढ़ाकर 10% तक किया गया। बाद में यह 12.5% और फिर करीब 15% तक पहुंच गया। इसके बावजूद मांग में खास गिरावट नहीं आई। 2024 में शुल्क घटने के बाद आयात फिर तेजी से बढ़ा और 2025 में भारत का गोल्ड आयात करीब 58.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। बदलती पसंद अब उपभोक्ता भी बदल रहे हैं। लोग भारी गहनों की जगह हल्के डिजाइन, 18 कैरेट ज्वैलरी और पुराने गहनों के एक्सचेंज मॉडल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इससे बाजार में खरीदारी का तरीका भी धीरे-धीरे बदल रहा है। डिजिटल निवेश में बढ़ता रुझान सोना अब सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोग इसे डिजिटल रूप में भी तेजी से अपनाने लगे हैं। डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्पों में निवेश लगातार बढ़ रहा है। अब देश में गोल्ड ईटीएफ निवेशकों की संख्या 1.24 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है, जिनमें करीब 20 लाख निवेशक उत्तर प्रदेश से हैं। 2025 में इसमें करीब 43,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जिसमें यूपी की हिस्सेदारी भी लगभग 6,200 करोड़ रुपये रही, खासकर नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों से यह रुझान ज्यादा देखने को मिला। सोना अब भी सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प विशेषज्ञों का कहना है कि सोना सिर्फ गहना नहीं बल्कि सुरक्षित बचत का साधन माना जाता है, इसलिए टैक्स और कीमतों में बदलाव का भी इसकी मांग पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ता। ये भी पढ़ें: यूपी में सपा सरकार बनी तो 90 दिनों में सुलझेगा 69000 शिक्षक भर्ती विवाद, अखिलेश यादव का बड़ा वादा